अपराध

आप जानते है आवेग और अपराध के बीच क्या सम्बन्ध होता है ?

कभी-कभी, हमें अपराध के बारे में सुनने को मिलता है कि जो अपराध आवेग के कारण हुआ हो या अचानक से एक पल भी सोचे समझे बिना अपराध किया गया हो कि इसका परिणाम क्या होगा। जैसे, कुछ व्यक्ति हिंसक तरीके से किसी को उकसाने पर प्रतिक्रिया करते हैं या कुछ भी ऐसा काम करते है जो की जोखिम भरा हो।

यह आपको कैसे पता चल पायेगा कि कोई व्यक्ति आवेगी है या नहीं? उसके लिए, उनके समक्ष किसी भी काल्पनिक परिदृश्य की कल्पना करें और बताये और उनसे पूछें कि वे उस काल्पनिक परिदृश्य पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे।

उनमे से कुछ लोग ऐसे होंगे जो किसी विशिष्ट रणनीत का उपयोग करेंगे, और कुछ ऐसे होंगे जो कोई परिणाम सोचे बिना ही उस कार्य को करेंगे उनको फर्क नही पड़ता है की उसका परिणाम क्या होगा ? उनमे से कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो महसूस कर पाएंगे की उस परिस्थिति में वो कोई भी प्रतिक्रिया जल्दी नही कर सकते है और समय लेने में सक्षम नही है।

अपराध और आवेग में संबंध

यदि अपराध करने वाले व्यक्ति के पास आत्म-नियंत्रण है, तो बहुत से अपराधों को रोका जा सकता है। आत्म-नियंत्रण में कमी कई लोगों में होती है जिसकी वजह से कई अपराधों को जन्म हुआ है , और आवेग उनमें से एक है। आवेग कई स्तरों का हो सकता है। लेकिन आवेग नियंत्रण से संबंधित आवेग और विकार थोड़ा सा अलग होता हैं।

आवेग नियंत्रण से संबंधित विकार कार्य करने से अपने आप को नियंत्रित करने में कई बार विफल रहा है और इसका विरोध करने में सक्षम नहीं है और फिर कार्य करता है।

कभी कभी प्रदर्शन किया गया कार्य हानिकारक भी साबित हो सकता है लेकिन आवेग में आकर व्यक्ति को यह कार्य करने पर खुशी मिलती है और वह खुश होती है उनको लगता है उन्होंने अच्छा काम किया है, भले ही वह किसी के लिए या आपके ही लिए हानिकारक हो। लेकिन ऐसे कार्य को करने के बाद ही, उस व्यक्ति को अपराध करने या उसे करने का अफसोस होता है। परन्तु एक कार्य एक बार किया जाता है, तो इसलिए इसके बारे में हम कुछ भी नहीं कर सकते है।

मनोरोग विकार के अंतर्गत अथक आवेगों की संभावनाएं भी आ सकती है। और यह एक ऐसा व्यवहार होता है जो कभी कभी किसी को खुद ही नुकसान पंहुचा सकता है। इससे उस व्यक्ति कोई लाभ नही होता है पर उस पर खुद का नियंत्रण नहीं होता है। एक पतले सीमारेखा होती है इसलिए अक्सर कहा जाता है हमको की किसी भी कार्य को करने से पहले सोच लेना चाहिए। सोच समझ कर किया गया कार्य गलत नही होता है।

किसी को उकसाने या किसी और हिंसक प्रतिक्रियाओं पर क्रोध का प्रकोप हो सकता है जो आपके लिए हानिकारक भी साबित हो सकता है। अक्सर व्यक्ति के आत्म-नियंत्रण की कमी के साथ-साथ कई परिस्थितियाँ या स्थिति भी भूमिका निभाती है।

निष्कर्ष

इसलिए किसी व्यक्ति से अपराध तब होते हैं जब वह व्यक्ति आवेगी होता है और अंतिम परिणाम के बारे में बिना सोचे कार्य करता है या उस पर प्रतिक्रिया देते है।

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