ड्राइविंग लाइसेंस

कर्मचारी के ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण की जिम्मेदारी नियोक्ता की होती है।

कर्मचारी के ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण के जिम्मेदारी उसके मालिक की होती है कि अपने वाहन चालक के लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले उनका नवीनीकरण कराये।

जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी के मामले में बेली राम बनाम राजिंदर कुमार एंड अनर सिविल अपील नं. 7220-7221 2011 ने कहा कि नियोक्ता को यह देखने के लिए ज़िम्मेदार होना चाहिए कि उसका कर्मचारी समय के भीतर अपने ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण करवाए।

बेली राम बनाम राजिंदर कुमार एंड अनर सिविल अपील नं. 7220-7221 2011 के मामले में जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा है कि नियुक्ता की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए की वह देखे कि उसके कर्मचारी जो समय दिया गया उसके भीतर अपना ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण करवाए।

अदालत ने यह भी कहा है कि यदि वहां चालक ने अपने ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण नही करवाया है , तो बीमा कर्मचारी उसका जिम्मेदार नहीं होगा जब तक कि मालिक यह साबित नहीं कर देता कि उसने चालक के लाइसेंस की जाँच कर ली है और उसने चालक के लाइसेंस का नवीनीकरण करने का आदेश जारी कर दिया है।

इस मामले में, राजिंदर कुमार को बेली राम ने चालक के रूप में नियुक्त किया है, राजिंदर का एक्सीडेंट तब हुआ जब वह बेली राम का ट्रक चला रहा थ। 1923 के कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत राजिंदर ने अदालत में याचिका दायर की थी।

कमिश्नर ने चोटों के लिए रु 67,313 और बीमा के लिए 94,464 / – चिकित्सा का पूरा खर्चा देने के लिए निर्देश दिए थें। और जो भी ब्याज होगा उसका भुगतान नियोक्ता करेगा ऐसा निर्देश दिया गया था।

जब उच्च न्यायालय में अपील की जाती है, तो उच्य न्यायालय बीमा कंपनी को किसी भी दायित्व से मुक्त कर दिया जाता है, और यहाँ मन जाता है कि बीमा पॉलिसी की एक समय सीमा होती है, जिसमें दावेदार/ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस उचित समय में समाप्त हो गया था।

यह भारत के उच्य कानूनी निर्णय में से एक है।

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