कानून

कानून, नियम और संविधान के बीच में अंतर सरल शब्दों में समझें।

आम तौर पर हम अक्सर सुनते हैं कि “कानून का पालन करो” !! “नियम मत तोड़ो । “नियम” और “कानून” और “संविधान” के बीच अंतर होता है।

कानून

कानून एक विशिष्ट देश या एक समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त होता है और उसके बाद जो नियम निर्धारित किये जाते है उनका एक संगठित समूह होता हैं। यह किसी देश और किसी समाज के लोगों के कार्यों पर प्रतिबंध रखने का एक प्रणाली है और अगर देश के लोगों उन नियमो का उल्लंघन करते है तो उसके परिणामस्वरूप उन लोगों को दंडित किया जा सकता है।

हर देश के अपने अलग अलग कानून होतें है। जो भी कानून होती है वे उस समय के वैधानिक कानून बन जाते हैं, जब इन्हे उस देश के विधानमंडल द्वारा बिल बनाने के बाद पारित कर दिया जाता है। उस देश का संप्रभु अधिकार द्वारा कानून भी बनाए जाते हैं और इसको बनाने की योग्यता अन्य अधीनस्थ लोगों को सौंपी दी जाती है।

इसने समाज में लोगों के व्यवहार को नियंत्रित किया हुआ है और “DO’s” और “DON’T” का भी वर्णन किया है। जज, पुलिस जैसी कानून अमल एजेंसियां ​​हैं। कानून में सिद्धांत, प्रक्रियाएं,और मानक या एक निर्धारित सीमा होती हैं जिनका हम सबको पालन भी करना होता है। जो व्यक्ति कानून का उल्लंघन करते है उनको न्यायालयों द्वारा दंडित भी किया जा सकता है और सामुदायिक सेवा, अपमानजनक जुर्माना, आदि करनी पड़ सकती है।

जब भी कोई भी कानून बनाया जाता है तो, इसको बनाने वालों को हर पहलू और कोणों को देख कर ही और परिणामों को निर्धारित करने की आवश्यकता होती है।

जब किसी भी देश का कानून तोड़ा जाता है तो जिस कानून को तोडा है उसी के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है। लेकिन जब इसको बनाया जाता है तो इसे प्रक्रियाओं के एक विशेष गुट से गुजरना पड़ता है और इसे उस देश की विशेष सरकार द्वारा बनाया और निर्धारित किया जाता है।

 

नियम

आम तौर पर, नियम निर्देश हैं जो हमें उन चीजों के बारे में एक विचार देते हैं जिस चीज की हमें अनुमति दी जाती है और जिस चीज की अनुमति नहीं हैं। नियम कानून बनाते हैं। वे संगठन या सिस्टम के कुशल कामकाज के लिए दिशानिर्देश भी हैं। परन्तु नियम लचीले होतें हैं, कानूनों के विपरीत होतें है।

नियमों को किसी संगठन या प्रणाली में आंतरिक रूप से होने वाले परिवर्तनों के अनुसार बदला भी जा सकता है या स्थितियों या लोगों पर निर्भर करता है पर यह कानून जितना औपचारिक नहीं है। नियमों का प्रवर्तन करने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है और नियमों का उल्लंघन करने का परिणाम जो व्यक्ति नियमों को लागू करता है उस पर भी निर्भर करता है।

बहुत बार , नियमो की आवश्यकता परिस्थितियों के अनुसार होती है। नियम कही भी हो सकते है एक घर में भी हो सकते है या एक स्कूल में भी हो सकते हैं। नियम कानून से अलग हैं। खेलों में नियम होतें है। नियम किसी भी व्यक्तियों द्वारा निर्धारित किए जा सकते है। और जो व्यक्ति नियमो का उल्लंघन करता है तो इसके परिणाम जो होतें है वह आम तौर पर हल्के होते हैं।

 

संविधान

संविधान दुनिया का शीर्ष नियम है। यह तीन कार्य करता है। संविधान सरकार बनाता है मतलब सरकार का ढांचा तैयार किया जाना संविधान के अनुसार होता है। इसे कोई भी सरकार अपनी मर्जी से और अपने तरह इसको बदल नहीं सकती। यह सरकार को कुछ शक्तियां देते है ताकि सरकार कानून बना सके, उन्हें देश में लागू कर सके और देश में सौहार्द और शांति, और ईमानदारी की स्थापना कर सके।

यह सरकार को जो शक्तियां प्रदान की जाती है उन पर नियंत्रण रखता है ताकि सत्ता में ऊंची पद पर बैठे हुए अधिकारी अपने मनमानी न चला पाएं। अपने देश के अस्तित्व के खिलाफ कोई भी गलत फैसला न लाए सकें और कभी भी ऐसा कानून न बना सके जो देश के जनता के लिए नुकसानदायक साबित हो .

 

निष्कर्ष

तो यह आपको हो सकता है सरल लग सकता है लेकिन कानून और नियम और संविधान के बीच पर्याप्त अंतर होता हैं। यह इस चीज की स्पष्टता दे सकता है कि नियमों के रूप में क्या विस्तृत किया जाना चाहिए और कानूनों के रूप में क्या विस्तृत किया जाना चाहिए। और संविधान के रूप में क्या विस्तृत किया जाना चाहिए।

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