कानूनी सलाह

क्या आप जानते है कानूनी सलाह और कानूनी राय में अंतर होता है ?

कानूनी सलाह

अक्सर, कानूनी राय और कानूनी सलाह की अदला-बदली की जाती है और इसलिए लोग अक्सर भ्रमित हो जाती है । इस मामले के बीच एक सीमा होती है: कानूनी राय और कानूनी सलाह। यह दोनों अलग अलग बात है यहाँ पर यह समझेंगे की इसमें अंतर क्या होता है ?

कोई भी व्यक्ति अपने मामले के लिए वकील से परामर्श कर सकता है कि जो आने वाले समय है उसमे उसको क्या कदम उठाना चाइये और उसका उपाय क्या किया जा सकता है और वकील जो सलाह देता है उसको कानूनी सलाह कहा जाता है।

यह एक ग्राहक द्वारा लिया जा सकता है जो आने वाले समय में मामलों को कैसे निपटाए जाने के लिए निर्दिष्ट करता है जैसे कि मुकदमा दायर करना चाइये या नहीं; या क्या मामले को ख़तम कर देना चाहिए या नहीं।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हमेशा कानूनी सलाह वकीलों द्वारा ही दी जाती है। कानूनी सलाह देने के लिए, वकीलों को कानून का व्यापक अनुसंधान करने की जरुरत होती है और यह देखन भी जरूरी होता है कि ग्राहक द्वारा वकील को बताई गई स्थिति पर कौन सा कानून और कैसे लागू होगा।

और ग्राहक को सारे बात समझाने के लिए उसके समझने योग्य शब्दो का उपयोग करना चाहिए , उनको अपनी बात समझने के लिए सरल भाषा का उपयोग करने की जरुरत होती है जिससे सामने वाले को आपके पूरी बात समझ आ जाये।

ग्राहक को कानून की कुछ चीजें समझने के बाद, वकील को उसको सुझाव देना होगा कि भविष्य में उसको क्या कदम उठाने की जरुरत पड़ेगी या क्या कदम उठाना है और जो कदम उठाने जा रहे है उस कदम को उठाने के लिए कारण क्या है जिससे ग्राहक को आसानी से हुए जल्दी बात समझ में आ सके, जिससे वह ग्राहक वकीलों का नियमित ग्राहक बन सके। और कानूनी सलाह पाने के बाद वह किसी और को भी वकील से परामर्श करने के लिए भेज सके।

इसके अलावा, वकील अदालत में अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करते समय उसको कानूनी सलाह देते हैं और उसको अदालत में क्या कहना है क्या नही उसका भी मार्गदर्शन देते हैं। यह वकील द्वारा क्लाइंट को दी गई कानूनी सलाह भी है।

इसके अलावा, जब वकील कानूनी दस्तावेज तैयार करते है, तब वे ये भी समझाते हैं कि केस पर कैसा प्रभाव डाल सकता है और ग्राहक को कानूनी दस्तावेज का क्या महत्त्व होता है और उसका क्या प्रभाव हो सकता है उसके बारे में भी कुछ विचार देता है।

 

कानूनी राय

कुछ तथ्यों के विश्लेषण के आधार पर जोकि अतीत या वर्तमान हो भी सकता हैं, एक वकील कानूनी राय दे सकता है। कुछ मामले जैसे की प्रॉपर्टी के मामलों में कानूनी राय ली जा सकती है, ऐसे ही पिछले या वर्तमान मामलों से जो अन्य मुद्दे संबंधित हो उनके लिए कानूनी राय ली जा सकती है।

हर किसी को या किसी दूसरे को कुछ न कुछ कानूनी समस्या होती है जब वे अपने कानूनी मामले के ले लिए किसी वकील से संपर्क करने के लिए पहुंच लगता है और वह यह जानना चाहते हैं कि क्या उनकी समस्या में किसी भी प्रकार की योग्यता होगी यह समस्या कानूनी है या नहीं, तो वकील उसको कानूनी राय देता है, उस व्यक्ति की बात सुनने के बादउसकी पूरी बात समझना।

अधिक से अधिक कानूनी राय कॉर्पोरेट लेनदेन या किसी और लेनदेन के बारे में हो सकती है।

कानूनी राय, अक्सर वकीलों द्वारा एक लिखित दस्तावेज होता है, जैसा कि वकील ने संबंधित मामले में जो प्रस्तुत तथ्य है उनको समझा है और इस मामले को उस विशेष मुद्दे या कानून पर लागू कानूनों के साथ अपना दृष्टिकोण देता है। उस मामले पर विशेष कानून के साथ अपना दृश्टिकोण रखता है और कौन सा कानून उस मामले पर लागू हो सकता है बताता है।

निष्कर्ष

वकील से जब भी आप सलाह लें तो यह अवश्य निर्दिष्ट करें कि आपको कानूनी राय की जरूरत है या कानूनी सलाह की और जिस वकील से आप रे या सलाह लेने जा रहे है वह वकील आपको आपके आवश्यकता के अनुसार सलाह या राय दे सकता है या नहीं।

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