घरेलू हिंसा

क्या तलाक के बाद भी पुरुष हो सकते है घरेलू हिंसा के दोषी ?

क्या एक महिला अपने तलाक के बाद भी घरेलू हिंसा अधिनियम से महिलाओ के संरक्षण के तहत एक आदमी के खिलाफ घरेलू हिंसा का case दायर कर सकती है उस आदमी को कोर्ट में घसीट सकती है ? और जब कि उसने किसी दूसरे व्यक्ति से पहले से ही शादी कर ली है ? ऐसे सवाल अक्सर दिमाग में आते है

गुजरात हाई कोर्ट ने इस प्रकार के मामलों पर कहा है कि महिला को ऐसे मामलों में सम्बंधित अधिनियम के तहत पीड़ित व्यक्ति नही कहा जा सकता है। उनका कहना है कि ऐसा करने से महिला को एक अन्यायी व्यक्ति के रूप में नही माना जा सकता है।

न्यायमूर्ति उमेश त्रिवेदी का कहना है कि वैवाहिक वंधन में वंध जाने के बाद जब उसके रिश्ते को तलाक के माध्यम से तोडा जाता है तो पत्नी तब तक ही पीड़िता मानी जाएगी जब तक उनका रिश्ता बचा हुआ है और एक बार तलाक हो जाने के बाद में उसके बीच कोई भी रिश्ता नही बचता है इसलिए महिला पीड़िता व्यक्ति नही मानी जाएगी।

अदालत का मानना है कि तलाक हो जाने के बाद उनके बीच सारे घरेलू रिश्ते और सम्बन्ध ख़तम हो जाते है। और ना ही उस महिला को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पीड़ित व्यक्ति माना जायेगा।

इसलिए पति द्वारा पत्नी से तलाक लेने के बाद , पत्नी, अधिनियम के तहत इस प्रकार के प्रावधान पति पर लागू नही किये जा सकते है। यह निर्णय भारत के सर्वोच्य निर्णय में से एक माना जाता है।

यह केस सुरेंद्रनगर शहर का है। यह जोड़ा 1984 में विवाह के बंधन में वंधा था। पर कुछ समय पश्चात 1989 ने पति ने तलाक के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। एक वर्ष पश्चात 1990 में इस विवाद का निपटारा हो गया और उन्होंने औपचारिक रूप से तलाक ले लिया। कुछ समय बाद महिला ने किसी और व्यक्ति से शादी कर ली और जिसके साथ उसके 3 बच्चे भी थे।

27 साल के पश्चात महिला ने अपने पूर्व पति पर 2 केस दर्ज किये। जब उसका पूर्व पति बीएसएनएल से रिटायरमेंट के कगार पर था। उस व्यक्ति के वकील ने कहा कि उसकी पूर्व पत्नी अपनी सेवानिवृत्ति लाभों पर नजर रखने के लिए उससे रखरखाव की मांग की। महिला ने सुरेंद्रनगर परिवार अदालत में CRPC की धारा 125 के साथ घरेलु हिंसा अधिनियम के तहत घरेलु सम्बन्ध के कारण खुद को पीड़िता होने का दावा किया।

उसके वकील के बताये अनुसार उसने अपनी पूर्व पत्नी की दूसरी शादी के सबूत दिखाए। सबूतों को देख कर अदालत ने महिला की याचिका को ख़ारिज कर दिया।

घरेलू हिंसा के परिभाषा के तहत, यह रिस्ता एक ऐसा रिश्ता है। जो दो व्यक्ति के बीच में जीवित रहता है। यहाँ तक कि यदि पति पत्नी अलग अलग रहने लगे तब भी वैवाहिक सम्बन्ध जारी रहता है। पर जब पति पत्नी तलाक के माध्यम से अपने वैवाहिक समबन्ध ख़तम करते है तो उसके बीच के भी सारे रिश्ते ख़तम हो जाते है।

एक मजिस्ट्रयल अदालत में घरेलू हिंसा के तहत महिला की शिकायत पर संज्ञान किया। पीड़ित होने के दावे को स्वीकार के बाद कार्यवाही की। इस मामले पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला किया कि एक गैर जिम्मेदाराना निष्कर्ष है कि एक तलाकशुदा पत्नी जिसने पुनर्विवाह किया है वह अपने पूर्व पति के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत किसी भी प्रावधानो को लागू नही कर सकती है।

b’State_Of_Gujarat_vs_Vikrambhai_Kanjibhai_Parmar_on_1_March,_2018′

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