भारतीय दंड संहिता

“भारतीय दंड संहिता” (आईपीसी ) धारा 506 की कुछ मुख्य बातों पर प्रकाश.

  1. “भारतीय दंड संहिता” को हिंदी में भारतीय दंड विधान भी कहा जाता है। पहला विधि आयोग 1834 में बनाया गया था जिसके चेयरपर्सन लॉर्ड मैकॉले थे। आईपीसी का ड्राफ्ट भी इन्ही की अध्यक्षता में तैयार किया गया था।
  2. यह कानून 6 अक्टूबर 1860 में संसद में पास हुआ था। और 1862 में यह क़ानून पुरे देश में लागू हो गया था। आईपीसी में कुल 511 धाराएं है और 23 अध्याय है ।
  3. “भारतीय दंड संहिता” भारत का प्रमुख आपराधिक कोड है। यह भारत के नागरिक द्वारा किये गए अपराध और उस अपराध को करने पर जो दंड मिलता है उस दंड को परिभाषित करता है। और यह कोड भारतीय सेना को छोड़कर पुरे देश में लागू होता है।
  4. आईपीसी की धारा 506 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को हत्या की धमकी, बलात्कार की धमकी या उसके जीवन, संपत्ति या परिवार को नुकसान पहुंचने की धमकी देकर उसको डरता है तो उस व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत आरोप लगाया जा सकता है।
  5. मृत्यु या चोट पहुंचाने की धमकी, या किसी भी व्यक्ति की संपत्ति को आग लगा कर नष्ट करने के लिए , आपराधिक धमकी देता है तो उसे आईपीसी की धारा 506 के तहत दोषी ठहराया जायेगा। इसकी सजा 2 वर्ष का कारावास या आर्थिक दंड या दोनों है ।
  6. साथ ही कोई व्यक्ति किसी महिला पर आरोप लगता है या किसी महिला के चरित्र और सम्मान को दोष देता है उस पर आईपीसी की धारा 506 के तहत आरोप लगाया जाता है. इसमें अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जा सकती है जिसे 7 वर्ष तक भी बढ़ाया जा सकता है और आर्थिक दंड या दोनों दंड भी दिए जा सकते है ।
  7. आपको यह बता दें की यह अपराध एक जमानती, गैर-संज्ञेय है। आपको एक बात और बता दें कि यह अपराध पीड़ित व्यक्ति चाहे तो समझौता भी कर सकता हैं |
  8. किसी भी व्यक्ति से अपनी बात मनवाने के लिए किसी आपराधिक तरीके से धमकी देना ये भी धमकी की श्रेणी में ही आती है इस तहर की धमकी अपराधिक धमकी मानी जाती है। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की धमकी देता है तो उस पर आईपीसी धारा 506 की धारा लागू हो जाएगी ।
  9. आईपीसी धारा 506 में गवाहों की ज्यादा जरुरत नही पड़ती है। अगर जिस व्यक्ति को धमकी मिली है वह अदालत में साबित कर दे कि उसको इस बात की धमकी दी गई है इतना ही काफी होता है ।
  10. यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को कोई बड़ा अपराध करने की या मृत्यु की धमकी देता है, या किसी महिला की इज्जत पर लांछन लगाने की धमकी देता है या आग से जला कर नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है, या फिर किसी संपत्ति को आग से जलाकर नष्ट करने की धमकी देता है, तो ऐसे व्यक्ति को सख्त सजा का भी प्रवधान जैसे कम से कम 7 साल तक के कारावास की सजा या मृत्युदंड भी दिया जा सकता है, इस सजा को आजीवन कारावास की सजा में भी बदला जा सकता है यदि अपराध ज्यादा गंभीर हुआ है, साथ – साथ आर्थिक दंड से दण्डित किया जा सकता है।
  11. आईपीसी धारा 506 में जिन अपराध के बारे में बताया गया है वह एक गैर-संज्ञेय अपराध है। इससे तात्पर्य यह है की इस अपराध में किस्से भी आरोपी को जमानत मिल सकती है।
  12. यदि कोई व्यक्ति किसे दूसरे व्यक्ति को साधारण आपराधिक धमकी देता है तो यह किसे भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होता है। यदि कोई व्यक्ति गंभीर चोट पहुंचाने या जान से मारने की आपराधिक धमकी देता है तो यह प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होता है। यदि पीड़ित व्यक्ति चाहे तो समझौता कर सकता है पर उसको समझौता मजिस्ट्रेट के ही सामने करना होता है ।
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