साइबर अपराध

“साइबर अपराध” आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है।

जैसा कि हम सब जानते है। हर चीज के दो पहलू होते है पक्ष और विपक्ष। वैसे ही technology के भी दो पहलू है। Advantage और Disadvantage। जब टेक्नोलॉजी का गलत उपयोग होता है तो वह साइबर अपराध होता है। जब किसी व्यक्ति या व्यक्ति के समूह द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचने के लिए किसी व्यक्ति के खिलाफ इंटरनेट के माध्यम से किया जाने वाला अपराध “साइबर अपराध” कहलाता है।

देखा जाये तो एक राष्ट्र का वित्त और उसकी सुरक्षा भी खतरे में है क्यों कि अब ज्यादा से ज्यादा काम कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से होता है। साइबर अपराध में “हैकिंग, साइबर स्टॉकिंग, चाइल्ड प्रोनोग्राफी, सेक्सटॉर्शन, वायरस हमले, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी” आदि शामिल है।

कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की गोपनीय जानकारी की गोपनीयता बढ़ते साइबर अपराधों के कारण एक चिंता का विषय है। मोबाइल फ़ोन और इंटरनेट जैसे आधुनिक दूरसंचार नेटवर्क ने साइबर अपराध को अंजाम दिया है।

लोग या लोगों के समूह द्वारा वरती जाने वाली लापरवाही कंप्यूटर सिस्टम पर महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा इसके प्रमुख कारण है। कारण तो बहुत है पर यह कारण उनमे से एक है।

एक और महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि हैकर्स द्वारा बायोमेट्रिक सिस्टम और फ़ायरवॉल जैसे जटिल तकनीकी को बहुत ही आसानी से भंग कर लेते है। इसके अलावा ऑपरेटिंग सिस्टम में कोड में दिक्क्त हो सकती है। जिसका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा अपराध करने के लिए किया जाता है। क्यों कि कंप्यूटर में डाटा को फाइल के रूप में करने और कम space की जरुरत होती है। यह कारण भी साइबर अपराध में जोड़ा जाता है।

साइबर अपराध का सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि इसके सबूतों को आसानी से ख़तम किया जा सकता है। जिसमे साइबर अपराधी की ट्रैकिंग नही हो पाती है और वह बचे रहते है।

साइबर अपराध आपके साथ ना हो उसके लिए कुछ तरीके है।

  1. ऑनलाइन खातों के पासवर्ड समय – समय पर बदलने चाहिए।

  2. यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पासवर्ड मजबूत हो। फाइलों को इन्क्रिप्ट करना चाहिए।

  3. सोशल मीडिया पर हमेशा गोपनीय मोड ऑन रखना चाहिए।

  4. सावधानी वरतनी चाहिए जब आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी इंटरनेट पर इनपुट करें।

  5. हमेशा अपने कंप्यूटर और मोबाइल में सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर इनस्टॉल रखने चाहिए और इनस्टॉल करते समय सावधानी वरतनीय चाहिए। पहले से उस सॉफ्टवेयर की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।

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